
अब यु ही तबियत बहल जायेगी
खत तेरा पढ़ कर ही रात गुजर जायेगी
हर तह में हे तेरी साँसों की खुशबु
अक्षर –अक्षर सूरत तेरी नज़र आएगी
महकने लगे हे चाहत के मंजर सुहाने
खुशी –खुशी में आँख मेरी भीग जायेगी
जख्म यु मुस्करा के खिल जायेंगे
मोहब्बत की दास्ताँ जब लबो पे आएगी
प्रवेश सोनी
बहुर सुन्दर भावपूर्ण गजल है। बधाई।
ReplyDeletethanks param jeet
ReplyDeletelazabaab gazal
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