
वेदना का मोन निमंत्रण
आँख से चल पड़ा,
ना जाने कोनसे मन पे
देगा दस्तक .....
किस मन से पायेगा
अनुभूति का आधार
किस हर्प में
शब्द बन जुडेगा ...
ना जाने किस कथा का
होगा आधार ..
आबे -गंगा से भी
पूछ लेगा ,
कितना मैला में ,
तू कितना पावन ...
दर्द मेने दिल का धोया
तुने धोया किसका अंतर्मन ....?
प्रवेश सोनी
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aap ka shabdkosh bahut rich hai or shabdo ko bunna khoob aataa hai apko..:)
ReplyDeleteशुक्रिया डिम्पल
ReplyDeletekya kahun Soni jee...sachh behadd umda likhti hain aap.
ReplyDeleteशुक्रिया नीलू जी
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