
ख्याल
कभी इधर से –
तो कभी उधर से
यु ही हर वक्त
सनसनाती हवा से
गुजर जाते हो नजदीक से तुम
एक ख्याल बन कर
तुम्हे पाने को मचल उठती हू ,
तुम्हे जीने के लिए
तड़प उठती हू
तुम्हे सोचते - सोचते
नसे टूट जाती हे ,
फिर उठती हे पलके
और दिवा स्वप्न से
तुम उनमे बस जाते हो !
तनहा होना चाहती हू
तुम्हारे ख्यालो से ..
पर तन्हाई में और भी
उमड़ घुमड़ कर बरस
जाते हे आँखों से ...
तब मन की भूमि
सिंचित होकर
अंकुरित करती हे
एक सवाल ...
क्यों नहीं आते हो तुम ??
ख्याल बन कर क्यों
सताते हो तुम ???
प्रवेश सोनी
bahut achchhi.
ReplyDeleteरचना बहुत सुंदर है लेकिन कुछ गल्तियां है। हिंदी पर मेहनत करनी होगी आपको....तुमे नहीं तुम्हें होता है
ReplyDeleteयु ही नहीं यूं होता है
तड़फ नहीं तड़प होती है
हे नहीं है
हू नहीं हूं
ध्यान दीजिएगा
चित्र बहुत अच्छा है
http://veenakesur.blogspot.com/
स्वागत है। कृपया http://afra-tafrih.blogspot.com/पर भी तशरीफ लाएं।
ReplyDeletesundar ati sundar
ReplyDeleteहिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
ReplyDeleteकृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें
आप सभी प्रबुद्धजनों का ह्रदय से आभार ,वीणा जी गलतियों की और ध्यान दिलाने के लिए कोटिशः धन्यवाद ,में सुधार करुँगी और आगे से प्रयास करुँगी की ऐसी कोई गलती न होए ,में अच्छा लिखने के लिए प्रयास रत रहूंगी .......सादर आभार
ReplyDeleteख़यालों को सजीव करती ,ख़यालों से बात करती एक सार्थक रचना के लिये रचनाकारा प्रवेश सोनी जी को दिल से बधाई।
ReplyDeleteशुक्रिया संजय जी
ReplyDeleteSoni jee..bahut khoob.
ReplyDeletebahut sundar rachna
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