
सपनों का सूरज
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वो पल
सर्द होकर
बर्फ से जम गए
यादो की पगडण्डी पर ..
गुजरे थे जो
तुम्हारी और मेरी
गर्म साँसों की राह से ...
पिघलते नहीं
आँखों के बहते
खार से ...
चुभते है
फांस से
असहनीय पीड़ा बन ,
और कभी अचानक से
खिल जाते
मुस्कराहट बन
गाहे बगाहे यह पल
उगा देते है
मेरे हिस्से की धूप लेकर
जीवन में सपनो का सूरज.....!!! ,
प्रवेश सोनी
aapke hisse ka dhoop...ne chamka diya sapno ka suraj:)
ReplyDeleteaap behtareen likhte ho...
thanks Mukesh ji
ReplyDeleteगाहे बगाहे यह पल
ReplyDeleteउगा देते है
मेरे हिस्से की धूप लेकर
जीवन में सपनो का सूरज.....!!! ,waah bahut khoob ... !!
क्षितिजा जी आभार सहित धन्यवाद
Deleteगाहे बगाहे ये पल
ReplyDeleteउगा देते हैं
मेरे हिस्से की धूप लेकर
जीवन में सपनों का सूरज ....
बहुत सुंदर .....
एक प्रभावशाली रचना ....:))
हरकीरत 'हीर ' जी आभार सहित धन्यवाद
Deleteपिघलते नहीं
ReplyDeleteआँखों के बहते
खार से ...
बढ़िया भाव कणिका .एक हूक सी पैदा करती सी .
dhanywaad Veerubhai
Deleteवाह......
ReplyDeleteशुभकामनायें आपको !
dhanywaad Satish saksena ji
Deletedhanywaad Prasann vadan chaturvedi ji
ReplyDeleteवाह!
ReplyDeleteशुक्रिया देवेन्द्र जी
Deletesabki apne apne hisse ki dhoop..sapne..
ReplyDeletebahut sundar rachna
थैंक्स कविता जी
Deleteबेहद खूबसूरत रचना |
ReplyDeleteथैंक्स मीनाक्षी जी
Deleteअति उत्तम ,,बेहतरीन रचना...
ReplyDeleteथैंक्स रीना जी
Deletebahut sundar bhav ---------
ReplyDeleteबहुत खूबसूरत है बारहा पढो ,मन हलका हो जाता है .
ReplyDeleteकृपया यहाँ भी पधारें -
सोमवार, 21 मई 2012
यह बोम्बे मेरी जान (चौथा भाग )
यह बोम्बे मेरी जान (चौथा भाग )
. .
ram ram bhai
)http://veerubhai1947.blogspot.in/
बहुत खूब लिखा है... सुंदर प्रस्तुति..आभार
ReplyDeleteपढ़े इस लिक पर
दूसरा ब्रम्हाजी मंदिर आसोतरा में जिला बाडमेर राजस्थान में बना हुआ है!
....
Waah, Bahut Sunder
ReplyDeleteभावपूर्ण रचना क्या कहने...
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर..
भावविभोर करती रचना...